Diya Jalawanv Tor Nam Ke Lyrics
प्रस्तुति – श्रद्धा विनोद कश्यप गीत – दियना जलांवव तोर नाम के (छत्तीसगढ़ी पंथी गीत ) (Chhattisgarhi Panthi Song) स्वर – कांतिकार्तिक यादव गीतकार – लाला धनेन्द्र संगीत – ओ.पी. देवांगन रिकार्डिंग – रागदीप स्टूडियो
भारत में प्रत्येक वर्ष 18 दिसंबर को गुरू घासीदास जयंती मनाई जाती है. घासीदास मूलतः छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे, लिहाजा इस दिन छत्तीसगढ़ में यह दिवस बड़े उत्साह एवं श्रद्धा भाव से मनाया जाता है. इस उपलक्ष्य में राज्य सरकार ने इस दिन राजकीय अवकाश घोषित किया हुआ है गुरु घासीदास का जन्म 18 दिसंबर 1756 को गिरौदपुरी (छत्तीसगढ़) स्थित एक गरीब परिवार में हुआ था, उनके पिता का नाम महंगू दास एवं माता का नाम अमरौतिन था. उनकी पत्नी का नाम सफुरा था. बचपन से ही सत्य के प्रति अटूट आस्था एवं निष्ठा के कारण बालक घासीदास को कुछ दिव्य शक्तियां हासिल हो गईं, जिसका अहसास बालक घासी को भी नहीं था, उन्होंने जाने-अनजाने कई चमत्कारिक प्रदर्शन किये, जिसकी वजह से उनके प्रति लोगों की आस्था एवं निष्ठा बढ़ी. ऐसे ही समय में बाबा ने भाईचारे एवं समरसता का संदेश दिया. उन्होंने समाज के लोगों को सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा दी. उन्होंने न सिर्फ सत्य की आराधना की, बल्कि अपनी तपस्या से प्राप्त ज्ञान और शक्ति का उपयोग मानवता के लिए किया. उन्होंने छत्तीसगढ़ सतनाम पंथ की स्थापना की |

दियना जलावंव तोरे नाम के हो बाबा
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के हो गुरु
दियना जलावंव तोरे नाम के
पैय्या लागव तोरे धाम के हो बाबा
माथ नवावव जैतखाम के
पैय्या लागव तोरे धाम के हो बाबा
माथ नवावव जैतखाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के हो गुरु
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के हो बाबा
दियना जलावंव तोरे नाम के
CG Songs Lyrics
पंच रतन के काया हे थारी
नयन के बाती बराये हौ
पान सुपारी कंठ जनेऊ
चंदन चौक पुराय हौ
पंच रतन के काया हे थारी
नयन के बाती बराये हौ
पान सुपारी कंठ जनेऊ
चंदन चौक पुराय हौ
तोर भक्ति मा हो के अरपन
तन मन तोला करके समरपन
धियान धरौ सतनाम के हो बाबा
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
मन मंदिर के गुरु गदिया मा
सत के कलस मढ़ाये हौ
दसों अंगुरिया जोड़ के तोला
श्रद्धा के फूल चढ़ाए हौ
मन मंदिर के गुरु गदिया मा
सत के कलस मढ़ाये हौ
दसों अंगुरिया जोड़ के तोला
श्रद्धा के फूल चढ़ाए हौ
सत के निशान मन भावन होगे
चंदन होगे पावन होगे
सत के निशान मन भावन होगे
चंदन होगे पावन होगे
माटी हा गिरौदपुरी धाम के हो बाबा
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
भटकत हंसा ये जिनगानी
मैं गोहरावव तोला हो
सत के रदा देखा के बाबा
उबार ले तै मोला हो
भटकत हंसा ये जिनगानी
मैं गोहरावव तोला हो
सत के रदा देखा के बाबा
उबार ले तै मोला हो
हे अमरौतिन महंगू के लाला
महिमा हे तोरे अजब निराला
हे अमरौतिन महंगू के लाला
महिमा हे तोरे अजब निराला
नित नित तोला परनाम हे गुरु
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
सुख संपत्ति मान मनौती
तोर किरपा के छैहा मा
अर्जी करत हौ मैं हा बाबा
राखबे तोरे पैय्या मा
सुख संपत्ति मान मनौती
तोर किरपा के छैहा मा
अर्जी करत हौ मैं हा बाबा
राखबे तोरे पैय्या मा
कांतिकार्तिक ला तै सँवारे
लाला धनेन्द्र ला तै हा सँवारे
कांतिकार्तिक ला तै सँवारे
लाला धनेन्द्र ला तै हा सँवारे
माला जपै तोरे नाम के हो गुरु
दियना जलावै तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के
पैय्या लागव तोरे धाम के हो बाबा
माथ नवावव जैतखाम के
पैय्या लागव तोरे धाम के हो बाबा
माथ नवावव जैतखाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के हो गुरु
दियना जलावंव तोरे नाम के
दियना जलावंव तोरे नाम के हो बाबा
दियना जलावंव तोरे नाम के
