मीर अली मीर छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और जनप्रिय कवि-गीतकारों में से एक हैं। छत्तीसगढ़ी साहित्य में उन्हें “जनता का कवि” कहा जाता है। मीर अली मीर सिर्फ कवि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी साहित्य के एक सच्चे पैरोकार हैं। उनकी कविता गांव-माटी की सोंधी खुशबू लेकर आती है और सीधे लोगों के दिलों से जुड़ जाती है।
Nanda Jahi Ka Re Lyrics In Hindi
(स्थायी)
ये नंदा जाही का रे
नंदा जा ही का रे
नंदा जा ही का
नंदा जाही का रे ,
नंदा जा ही का रे ,
नंदा जा ही का
नंदा जाही का रे ,
नंदा जा ही का रे ,
नंदा जा ही का
कमरा अउ खुमरी अरई-तुतारी
अ र र र र त त त छो……
(अंतरा १)
होत बिहनिया पखरा के आगी
टेड़गा हे चोंगी टेड़गा हे पागी
नुई झूले जस गरकस माला
धरे कसेली दउड़त हे ग्वाला
टेड़गा लेउड़ी ल बांखा दबाए
बंसी के धुन मा धेनु चरइया नन्दा जाही का..
कमरा अउ खुमरी अरई-तुतारी
अ र र र र त त त छो…….
(अंतरा २)
रचरच मचमच गेंड़ी मचईया
गांव गली म पँड़की नचईया
मांदर के थाप म राहस रचाये
पंथी के धुन ल गाए बजाए
गांव के लीला, चाऊंर के चीला
मेला मड़ई म ढेलवा झुलईया
नन्दा जाही का…
कमरा अउ खुमरी, अरई-तुतारी
अ र र र र त त त छो…
(अंतरा ३)
जिमिकान्दा, कनसईया उसनागे
लेड़गा बरी के बनईया नंदागे
दार के पीठी, अदौरी बरी ल
चेंच भाजी संग धरे जोड़ी ल
मही बिलोये, पठोये, मंगाए
डुबकी कढ़ी के रंधईया
नंदा जाही का…
नंदा जाही का रे ,नंदा जाही का रे
नंदा जाही का
कमरा अउ खुमरी, अरई-तुतारी
अ र र र र त त त छो…….
(अंतरा ४)
टेंड़ा बारी के टेंड़ा टेंड़ईया
घेंच म घांटी घुंघरू बंधईया
गोल्लर दउड़ै खावै अघावै
हरहा मरहा ल कोनो नई भावै
का मेड़वारी के घानी मुंदी म
गाए ददरिया दौरी खेदईया
नंदा जाही का….
ए नंदा जाही का रे, नंदा जाही का रे
नंदा जाही का
कमरा अउ खुमरी, अरई-तुतारी
अ र र र र त त त छो…….

