कायाखण्डी गीत छत्तीसगढ़ के लोक-संगीत की एक बेहद मार्मिक और लोकप्रिय विधा है। “काया” यानी शरीर और “खंडी” यानी टुकड़े-टुकड़े होना — इस गीत में जीवन, माया, मृत्यु और ईश्वर से जुड़ाव का दर्शन होता है। खासकर जसगीत, भजन और देवी-गीतों में कायाखण्डी के बोल सुनने वाले को झकझोर देते हैं। इसमें गायक शरीर की नश्वरता, माँ-बाप का प्रेम और महामाया से गुहार जैसे भाव रखता है।

