“ददरिया” छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक लोकगीत रूप है जो प्रेम, विरह और गांव-जीवन के भावों पर आधारित होता है। “राम ददरिया” नाम के गानों में राम-सीता के प्रसंग, भक्ति भाव, या नायक-नायिका के बीच ददरिया शैली का संवाद होता है। राम ददरिया छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की शैली का एक लोकप्रिय CG Song है।

रामे हे बन में
सीता ला लेगे चोर हे
आयोध्या ला खोजे
ये मोर भैया
लंका म मचे शोर हे
आयोध्या ला खोजे
गांव गौटिया गजब
गजब हुडियाए
सीता माई ला वो लेगे
ये मोर भैया
गजब दुरिहाए
सीता माई ला वो लेगे

पानी रे पी ले पियत भर ले
दोस दारी नई छुटै जियत भर ले
का हाथी ना घोड़ा पैदल रेंगे
रूख राई परानी सबो हा देखे
गाहूं गदेली उहित कबरी
बीच रद्दा म मिल गे दाई सबरी
अउ जूठा बोईर ला खवाए रे दोस्त
राम धरे परछी
लखन धरे बान
सीता माई के खोजन बर
ये मोर भैया
निकलगे हनुमान
सीता माई के खोजन बर
फागुन महिना डोमर फुलगे
राम नामा ला लेके हनुमान उड़गे
ये लंका म जा के सिया ला भेंटे
सोने सोन के लंका आगी म लेसे
नवा हे गाड़ी गजब दउड़े
ये दे पखरा के पुलिया पानी म तउरे
उही किसम ले लंका पहुंचगे रे दोस्त
आए ला पानी
पवन संग में
माते हावै गा लड़ाई
ये मोर भैया
रावण संग में
माते हावै गा लड़ाई
खेते रे नींदे बदौरी छांटे
दस मुड़ी रावन के राम हा कांटे
अरे नंदिया रे नरवा उलट धारे
जाने राम हा भेदे नाभी ला मारे
चारो मुड़ा म आनंद छा गे
राम लखन सिया संग आयोध्या आ गे
उही दिन ले देवारी मनाथे रे दोस्त

