“चोला माटी के हे राम” छत्तीसगढ़ का बहुत प्रसिद्ध लोकगीत/भजन है। इसे जीवन की नश्वरता और राम-भक्ति का संदेश देने वाला गीत माना जाता है।
हबीब तनवीर के “नया थिएटर” में सबसे पहले इसे उनकी बेटी नगीन तनवीर ने गाया था। पीपली लाइव फिल्म में भी यही गीत नगीन तनवीर की आवाज़ में है
यह गीत छत्तीसगढ़ी संस्कृति में भजन संध्या, रामायण मंडली और लोक मंचों पर खूब गाया जाता है। इसका मुख्य संदेश है – जीवन क्षणभंगुर है, राम नाम ही सच्चा सहारा है
(मुखड़ा)
चोला माटी के हे राम,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे,
चोला माटी के हे हो,
हाय चोला माटी के हें राम,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे ॥
(अंतरा-1)
द्रोणा जइसे गुरू चले गे,
करन जइसे दानी संगी,
करन जइसे दानी,
बाली जइसे बीर चले गे,
रावन कस अभिमानी,
चोला माटी के रे,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे ॥
(अंतरा-2)
कोनो रिहिस ना कोनो रहय भई,
आही सब के पारी,
एक दिन आही सब के पारी,
काल कोनो ल छोंड़े नहीं संगी,
राजा रंक भिखारी,
चोला माटी के रे,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे ॥
(अंतरा-3)
भव से पार लगे बर हे ते,
हरि के नाम सुमर ले संगी,
हरि के नाम सुमर ले,
ए दुनिया मा आके रे पगला,
जीवन मुक्ती कर ले,
चोला माटी के रे,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे ॥
चोला माटी के हे राम,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे,
चोला माटी के हे हो,
हाय चोला माटी के हें राम,
एकर का भरोसा,
चोला माटी के हे रे ॥

