सेवा में बाग लगाये पचरा जस गीत | Seva Me Bag Lagaye Lyrics Jas Pachara Geet

पचरा गीत, जस गीत का ही एक रूप है। इसे “पारंपरिक धुन में जसगीत” भी कहते हैं। पचरा शब्द ‘पचारना’ से बना है जिसका मतलब है माता को जगाना, मनाना। मांदर, झांझ और मंजीरे के साथ गाया जाने वाला यह गीत स्वरों के उतार-चढ़ाव में ऐसी भक्ति की मादकता जगाता है कि सुनने वाले का रोम-रोम माता की भक्ति में विभोर हो उठता है।

सेवा में बाग लगाये

लगाये हो मैया

सेवा में बाग लगाये हो माँ

(अंतरा 1)

हस के उठे विहस के माता

जा चंदन पर ठाड भवानी

नीबु जटा जटा पे नरियर

आस पास नरियर के बारी

केकती केवड़ा सदा न सरवर

सरवर देखत हंस बिराजे

हंस म दाई के पहुना साजे

पहुना उपर दाई बिराजे

दाई के संग म भैरव साजे

भैरव संग लंगुर बिराजे

हे अंजस मंजस कुंज निवारे

धर्म ध्वजा लहराए

लहराए हो मैया

सेवा में बाग लगाये हो माँ

सेवा में बाग लगाये

लगाये हो मैया

सेवा में बाग लगाये हो मां

(अंतरा 2)

जब इंद्र लोक ले उतरे लांगुरवा,
खैरा घोड़ा भये सांवरिया,
हाथ चंदन तोर पांव खड़ऊवा,
गंगा जमुना खड़ा पखारे,
सवा हाथ धरती तोरे पाटे,
उठे गुललेवा हाथ कमनिया,
रहीई खाये कुंजनिवारे,
कारी बदन तोरे भय महामाई,
पान खाते मुख लाल भवानी
जिभिया हा तोरे ललियारे
ललियाये हो मईया,
सेवा में बाग लगाए हो मां,
सेवा में बाग लगाए, लगाए हो मईया,
सेवा मे बाग लगाए हो माँ,
हे भवानी, सेवा में बाग लगाए हो माँ,
ओ मेरी मैया, सेवा में बाग लगाए हो माँ

(अंतरा 3)

जब लोहपुर ले उतरे लोअंजर,
मांग भर सिंदूर नयन में काजर,
कौरव पांडव बात सुनावे,
हाथ में शंकर वेद बतावे,
नव दस पलकी लिए सजाए,
बाये उंगली तोर उठे भवानी,
खड़ग क्षार खप्पर में डारे,
कोटि कोटि मुक्तन उठ जाए,
जभे पुजारी पूजा पावे,
घोरी घोरी चंदन महल लगाए,
सर्प सोन के कलश मढ़ाये,
दाई तोला उमा बुलाएं,
भैरव तोरे पालकी सजाए,
लंगूरे हा दीयना जलाये,
जलाये हो मैया,
सेवा में बाग लगाए हो मां,
सेवा में बाग लगाए, लगाए हो मईया,
सेवा मे बाग लगाए हो माँ,
हे भवानी, सेवा में बाग लगाए हो माँ,
ओ मेरी मैया, सेवा में बाग लगाए हो माँ,,…

(अंतरा 4)


जब गढ़ाई कुवछले उतरे लंगूरवा,
डम डम डम डम बाजे डमरूवा,
कारिया घोड़ा भए सांवरिया,
पांव में पायल हाथ खड़गवा,
गंगा तीर मा खड़ा पखारे,
तै हर तो रणजीत कहाये,
बात चिन्ह, चिन्ह तै ह चिन्हये,
चार कूट में धुनही गडाए,
देवता आए मंगल गए,
ऋषि मुनि सब यज्ञ कराए,
ब्रह्मा आए वेद उच्चारे,
विष्णु आए शंख बजाए,
सदाशिव तोर धुनी रमाए,
क्षमा धर तोर दिया जराए,
मदन‌ जस तोर सुनाए
सुनाए हो मईया,
सेवा में बाग लगाए हो मां,
सेवा में बाग लगाए, लगाए हो मईया,
सेवा मे बाग लगाए हो माँ,
हे भवानी, सेवा में बाग लगाए हो माँ,
ओ मेरी मैया, सेवा में बाग लगाए हो माँ

Jas Pachra Geet Dukalu Yadav

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